क्ता-बीज असुर का वध — माँ काली की उत्पत्ति की कथा

एक बार रक्ता-बीज नाम का शक्तिशाली असुर हुआ। उसकी विशेष शक्ति थी कि
जितनी बार उसका रक्त जमीन पर गिरता, उतने ही असुर और पैदा हो जाते।
देवता उसे मार नहीं पा रहे थे, क्योंकि उसका रक्त गिरते ही असुरों की सेना बढ़ जाती।
तब देवी दुर्गा अत्यंत क्रोधित हुईं और उनके क्रोध से काली का जन्म हुआ।
माँ काली ने युद्धभूमि में प्रवेश किया और रक्ता-बीज पर आक्रमण किया।
जब राक्षस का रक्त निकलने लगा, तो काली माता ने अपनी जीभ से सारा रक्त पी लिया, ताकि एक भी बूंद जमीन पर न गिरे।
अंत में रक्ता-बीज का वध हुआ और देवताओं की रक्षा हुई।
इसलिए माँ काली को “असुरों का संहार करने वाली” कहा जाता है।
⭐ 2. शिव पर पैर रखने वाली कथा (काली का शांत होना)

रक्ता-बीज और अन्य असुरों का वध करते-करते काली माता का क्रोध इतना बढ़ गया कि
वे तांडव करते हुए पूरे संसार को नष्ट करने लगीं।
देवताओं ने शिवजी से प्रार्थना की।
शिवजी माँ काली के सामने युद्धभूमि में निर्जीव रूप में लेट गए।
जब काली माता ने अनजाने में शिव पर पैर रख दिया तो
उनका क्रोध तुरंत शांत हो गया।
वे लज्जित होकर अपनी जीभ बाहर निकालकर खड़ी हो गईं।
यह दृश्य माँ काली के सबसे प्रसिद्ध स्वरूप में दर्शाया जाता है—
काली शिव पर खड़ी हैं और जीभ बाहर है।
⭐ 3. शुंभ–निशुंभ वध की कथा
असुर भाई शुंभ और निशुंभ ने स्वर्ग पर कब्जा कर लिया और देवताओं को निकाल दिया।
उन्होंने देवी को संदेश भेजा कि
“तुम्हारी सुंदरता देखकर हम तुम्हें चाहते हैं, हमारे संग चलो।”
देवी ने उत्तर दिया,
“जिसने मुझे युद्ध में जीत लिया, मैं उसी की होऊँगी।”
युद्ध में देवी ने उनका संहार किया। इस युद्ध में देवी के भीतर से
कौशिकी, चंडी, काली, शिवदूती जैसे अनेक रूप प्रकट हुए।
काली माता ने असंख्य असुरों का वध करके देवताओं को विजय दिलाई।
⭐ 4. चामुंडा रूप की कथा
दैत्यों चंड और मुंड ने देवी के दूत को धमकाया।
देवी क्रोधित हुईं और उनके क्रोध से काली माता का चामुंडा रूप प्रकट हुआ।
काली ने चंड और मुंड का वध किया और उनका सिर देवी को लाकर दिया।
देवी ने कहा—
“तुम चामुंडा कहलाओगी, क्योंकि तुमने चंड और मुंड का वध किया है।”
इसलिए काली का एक नाम चामुंडा भी है।
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⭐ 5. दक्षिणेश्वर की काली और रामकृष्ण परमहंस
कोलकाता के प्रसिद्ध दक्षिणेश्वर काली मंदिर में रामकृष्ण परमहंस ने वर्षों तक साधना की।
वे माँ काली को जीवित माँ के रूप में देखते थे—
उनसे बात करते थे, प्रश्न पूछते थे और समाधान पाते थे।
कहा जाता है कि माँ काली ने उन्हें अतुलनीय आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान किया और
उन्होंने अपने भक्तों के हृदय में “माँ” के प्रेम की अनुभूति कराई।