माँ काली हिंदू धर्म की सबसे शक्तिशाली और उग्र स्वरूपों में से एक मानी जाती हैं। वे माँ दुर्गा का उग्र रूप हैं और शक्ति, निडरता, समय, और अहंकार-विनाश की देवी हैं। उनका स्वरूप भयावह दिखता है, परंतु उनका उद्देश्य केवल असुरों का नाश और अपने भक्तों की रक्षा करना है।

⭐ माँ काली का स्वरूप
- शरीर का रंग: गहरा काला (अनंत शक्ति का प्रतीक)
- चार भुजाएँ: हाथ में खड्ग, त्रिशूल, काटा हुआ सिर, और वरद/अभय मुद्रा
- गले में: असुरों की खोपड़ियों की माला
- जीभ बाहर: अहंकार और बुराई का नाश
- पाँव से शिवजी के ऊपर खड़ी: यह दर्शाता है कि शक्ति ही ब्रह्मांड को चलाती है
⭐ माँ काली की उत्पत्ति
पुराणों के अनुसार, जब शक्तिशाली राक्षस असुरों को कोई रोक नहीं पाया तब माँ दुर्गा के क्रोध से काली का जन्म हुआ। काली ने सभी असुरों का संहार किया और संसार को विनाश से बचाया।
⭐ माँ काली का महत्व
- बुराइयों का विनाश
- भय और बाधाओं से मुक्ति
- तांत्रिक साधना की मुख्य देवी
- काल (समय) पर भी नियंत्रण
- भक्तों की रक्षा और उन्हें शक्ति प्रदान करना